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उगादि (Ugadi) दक्षिण भारत का एक प्रमुख और खास त्योहार है, जिसे नए साल की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है. यह त्योहार मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलांगना और कर्नाटक में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. “उगादि” शब्द संस्कृत के “युग” (समय) और “आदि” (शुरुआत) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है “नए युग की शुरुआत”. इस दिन से हिंदू पंचांग के अनुसार नया साल शुरू होता है, इसलिए इसे बहुत शुभ माना जाता है.
उगादि सिर्फ नया साल नहीं है, बल्कि यह नई उम्मीदों, नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक है. इस दिन लोग अपने पुराने दुखों और परेशानियों को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत करने का संकल्प लेते हैं. उगादि के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए कपड़े पहनते हैं. घरों की सफाई की जाती है और दरवाजों पर आम के पत्तों की तोरण (बंदनवार) सजाई जाती है. इसके बाद परिवार के लोग मिलकर भगवान की पूजा करते हैं और अच्छे साल की कामना करते हैं.
इस दिन खास तौर पर उगादि पचड़ी बनाई जाती है. यह एक खास डिश होती है, जिसमें मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा और नमकीन – सभी स्वाद शामिल होते हैं. यह जीवन के अलग-अलग अनुभवों (खुशी, दुख, गुस्सा, डर आदि) का प्रतीक माना जाता है. उगादि के दिन पंडित या घर के बड़े लोग नए साल का पंचांग (कैलेंडर) पढ़ते हैं. इसमें आने वाले साल की ग्रह-नक्षत्र की स्थिति, त्योहारों और भविष्य की जानकारी दी जाती है. इसे “पंचांग श्रवण” कहा जाता है.
इस दिन कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और संगीत का आयोजन भी होता है. लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और मिठाइयां बांटते हैं.
भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, जिसे उत्तर और मध्य भारत में विक्रम संवत के रूप में मनाया जाता है. दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में नववर्ष मनाने की परंपराएं अलग हैं.
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