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नहटौर (Nehtaur) उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक प्रमुख नगर है. यह बिजनौर शहर के पास स्थित है और अपने पुराने इतिहास, सामाजिक संरचना तथा शिक्षा से जुड़े विकास के लिए जाना जाता है. नहटौर का इतिहास काफी पुराना माना जाता है और इसके नाम के पीछे भी एक ऐतिहासिक कहानी जुड़ी हुई है.
बताया जाता है कि नहटौर नगर की स्थापना अजमेर राज्य के टागा मंत्री परिवार ने की थी. रणथंभौर, राजस्थान पर कुतुबुद्दीन ऐबक के कब्जे के बाद यह परिवार यहां आकर बस गया. उस समय इस स्थान का नाम “नई-ठौर” रखा गया, जिसका अर्थ “नया ठिकाना” या “नया निवास स्थान” होता है. समय के साथ यही नाम बदलकर नहटौर हो गया.
इतिहास में नहतौर की आबादी में विभिन्न वर्गों के मुस्लिम समुदाय के अलावा त्यागी ब्राह्मण, चौधरी और जैन समाज के लोग भी शामिल थे. यहां की सामाजिक संरचना में जमींदार, किसान, जुलाहे (बुनकर) और छीपी (ब्लॉक प्रिंटिंग का काम करने वाले) प्रमुख वर्ग माने जाते थे.
ब्रिटिश शासन के दौरान नहटौर की एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था का भी उल्लेख मिलता है. उस समय यहां “बारा टोपी सरकार” नाम से एक स्थानीय प्रशासन कार्य करता था. इसमें सैयद समुदाय के 12 प्रमुख और शिक्षित व्यक्तियों की भूमिका बताई जाती है, जो स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते थे.
नहटौर का संबंध सर सैयद अहमद खान से भी जुड़ा हुआ है. जब वे अलीगढ़ कॉलेज के लिए सहयोग और दान जुटाने के उद्देश्य से नहटौर आए, तब यहां के जमींदारों और नागरिकों ने उनका सकारात्मक स्वागत किया. स्थानीय लोगों की सोच और सहयोग से प्रभावित होकर उन्होंने नहटौर को “दानिशमंद” अर्थात “बुद्धिमान लोगों का नगर” कहा था.
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