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हर साल 1 मई को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (Labour Day) मनाया जाता है. आज ही के दिन दुनिया भर के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में बदला गया था. दरअसल, साल 1877 में मजदूरों ने अपने काम के घंटे तय करने की अपनी मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया. जिसके बाद एक मई 1886 को पूरे अमेरिका में लाखों मजदूरों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को लेकर हड़ताल की. इस हड़ताल में लगभग 11 हजार फैक्ट्रियों के 3 लाख 80 हजार मजदूर शामिल हुए. हड़ताल के बाद वर्ष 1889 में पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय महासभा की दूसरी बैठक में फ्रेंच क्रांति को ध्यान में रखते हुए एक प्रस्ताव पास किया गया. इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाए जाने की बात कही गई. प्रस्ताव के पास होते ही अमेरिका में सिर्फ 8 घंटे काम करने की स्वीकृति दे दी गई. जिसके बाद 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने जाने लगा.
भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने चेन्नई में 1 मई 1923 में की.
नागपुर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जाति और धर्म की राजनीति पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि विकास में कोई भेदभाव नहीं होता और सभी को समान सुविधाएं मिलती हैं.
लेबर डे के मौके पर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने मजदूर और मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ा दी है. खासकर 5 किलो वाले सिलेंडर के महंगे होने से प्रवासी और छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा. इसके साथ ही कमर्शियल गैस महंगी होने से खाने-पीने की चीजों की कीमत भी बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है.
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