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अशोक सराफ (Ashok Saraf) भारतीय फिल्म और थिएटर जुड़े एक अभिनेता और कॉमेडियन हैं. उनका जन्म 4 जून 1947 को महाराष्ट्र के मुंबई में एक मराठी परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दक्षिण मुंबई के डीजीटी विद्यालय (DGT Vidyalaya) से पूरी की. बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी और वे स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाटकों में हिस्सा लेते थे.
अभिनय की दुनिया में आने से पहले अशोक सराफ एक बैंक में नौकरी करते थे. इसी दौरान वे थिएटर से भी जुड़े रहे. बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह अभिनय को अपना करियर बना लिया. उन्होंने साल 1969 में मराठी फिल्म ‘जानकी’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. शुरुआती वर्षों में उन्होंने कई मराठी फिल्मों और रंगमंच पर सहायक भूमिकाएं निभाईं.
उनकी प्रमुख मराठी फिल्मों में ‘एक डाव भूताचा’ (1982), ‘धूम धड़ाका’ (1985), ‘आशी ही बनवा बनवी’ (1988), ‘भूताचा भाऊ’ (1989), ‘बालाचे बाप ब्रह्मचारी’ (1989) और ‘आयत्या घरात घरोबा’ (1991) शामिल हैं. इसी दौर में उनकी जोड़ी लक्ष्मीकांत बेर्डे, सचिन पिलगांवकर और महेश कोठारे जैसे कलाकारों के साथ कई फिल्मों में देखने को मिली.
मराठी सिनेमा के अलावा अशोक सराफ ने हिंदी फिल्मों और टेलीविजन में भी काम किया. उन्होंने ‘करण अर्जुन’ (1995), ‘यस बॉस’ (1997), ‘जोरू का गुलाम’ (2000), ‘सिंघम’ (2011), ‘नवरा माझा नवसाचा’ (2004) और ‘नवरा माझा नवसाचा 2’ (2024) जैसी फिल्मों में अभिनय किया. इसके अलावा वे कई हिंदी टीवी कॉमेडी धारावाहिकों का भी हिस्सा रहे हैं.
उन्हें 11 महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार, 4 फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार और वर्ष 2016 में फिल्मफेयर मराठी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. वर्ष 2023 में उन्हें महाराष्ट्र सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘महाराष्ट्र भूषण’ मिला. वहीं, वर्ष 2025 में भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया.
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