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कुंदरकी (Kundarki) उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का एक प्रमुख नगर है. यह मुरादाबाद-आगरा राजमार्ग पर स्थित है और मुरादाबाद शहर से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है. प्रशासनिक और ऐतिहासिक दृष्टि से यह क्षेत्र लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है.
कुंदरकी का इतिहास मुगल काल से भी पहले का माना जाता है. ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, इसका अस्तित्व 10वीं शताब्दी में भी था. प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता ने वर्ष 1363 में अपने सफर के दौरान कुछ समय के लिए यहां प्रवास किया था. बाद में मुगल सम्राट शाहजहां ने वर्ष 1628 में अब्दुल रज्जाक साहब को कुंदरकी का शहर काजी नियुक्त किया. उनके वंशज सर सैयद रजा अली को ब्रिटिश शासन के दौरान नाइट की उपाधि मिली और उन्हें दक्षिण अफ्रीका का एजेंट-जनरल बनाया गया.
वर्ष 1874 में मीर हादी अली ने कुंदरकी में रेलवे स्टेशन की शुरुआत करवाई, जिससे इस क्षेत्र की आवाजाही और संपर्क व्यवस्था को नया आयाम मिला. इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि कुंदरकी पर भटनागर राजा और कायस्थ वंश का प्रभाव रहा, जिनके वंशज आज भी यहां निवास करते हैं.
प्रशासनिक विकास की बात करें तो वर्ष 1858 में कुंदरकी को पंचायत का दर्जा मिला. इसके बाद 1907 में इसे टाउन एरिया घोषित किया गया. वर्ष 1960 में यह सामुदायिक विकास खंड बना. अगले कुछ दशकों में यहां जलापूर्ति व्यवस्था (1962), विद्युत उपकेंद्र (1976) और पुलिस थाना (1986) स्थापित किए गए. नगर के लगातार विकास को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1994 में इसे नगर पंचायत का दर्जा प्रदान किया.
कुंदरकी में एक छोटा ताजमहल भी स्थित है, जिसका निर्माण समाजसेवी चिद्दा खांसारी ने कराया था. यह नगर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है और स्थानीय पहचान का हिस्सा माना जाता है. आज कुंदरकी अपने ऐतिहासिक महत्व और प्रशासनिक विकास के कारण मुरादाबाद जिले के महत्वपूर्ण नगरों में गिना जाता है.
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