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केरल राज्य के पालक्काड़ जिले में स्थित साइलेंट वैली नेशनल पार्क (Silent Valley National Park, Kerala) भारत के सबसे अनोखे और जैव-विविधता से भरपूर वर्षावनों में से एक है. यह पार्क पश्चिमी घाट की नीलगिरि पहाड़ियों में फैला हुआ है और अपनी प्राकृतिक शांति, घने जंगलों तथा दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. इसका नाम “साइलेंट वैली” इसलिए पड़ा क्योंकि यहां आमतौर पर झींगुरों की आवाज सुनाई नहीं देती, जिससे वातावरण अत्यंत शांत प्रतीत होता है.
यह राष्ट्रीय उद्यान लगभग 237 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसे वर्ष 1984 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया. साइलेंट वैली सदियों पुराने उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों का संरक्षण करता है, जिन्हें दुनिया के सबसे प्राचीन वर्षावनों में गिना जाता है. यहां की जलवायु आर्द्र और ठंडी रहती है, जो वन्य जीवन के लिए अत्यंत अनुकूल है.
साइलेंट वैली जैव-विविधता का खजाना है. यहां 1000 से अधिक प्रकार के फूलदार पौधे, अनेक औषधीय वनस्पतियां और दुर्लभ पेड़ पाए जाते हैं. जीव-जंतुओं की बात करें तो यहां लायन-टेल्ड मकाक, नीलगिरि तहर, मलाबार सिवेट, हाथी, बाघ और तेंदुआ जैसे दुर्लभ व संकटग्रस्त जीव निवास करते हैं. इसके अलावा, यह पार्क पक्षी प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग माना जाता है, क्योंकि यहां कई स्थानिक और प्रवासी पक्षी प्रजातियां देखी जा सकती हैं.
साइलेंट वैली नेशनल पार्क पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में भी विशेष स्थान रखता है. 1970 और 1980 के दशक में यहां प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में व्यापक जनआंदोलन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र को संरक्षित किया गया. यह आंदोलन भारत में पर्यावरण जागरूकता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है.
प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और समृद्ध जैव-विविधता के कारण साइलेंट वैली नेशनल पार्क न केवल केरल बल्कि पूरे भारत की अमूल्य धरोहर है, जो प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं को समान रूप से आकर्षित करता है.
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