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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर (Omkareshwar Temple) भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और अपनी अनोखी भौगोलिक बनावट तथा आध्यात्मिक महत्ता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है. यह मंदिर नर्मदा नदी के बीच स्थित मंधाता द्वीप पर बना है, जिसका आकार ‘ॐ’ (ओंकार) जैसा माना जाता है. इसी कारण इस स्थान का नाम ओंकारेश्वर पड़ा और इसे शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है.
ओंकारेश्वर में मुख्य रूप से दो ज्योतिर्लिंग पूजित हैं- ओंकारेश्वर और ममलेश्वर (अमलेश्वर). नर्मदा के दो किनारों पर स्थित ये दोनों मंदिर शिव और शक्ति के अद्वितीय संगम के प्रतीक माने जाते हैं. श्रद्धालु आमतौर पर दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं.
मंदिर की वास्तुकला प्राचीन नागर शैली की झलक देती है. विशाल शिखर, पत्थरों पर की गई कलात्मक नक्काशी और शांत वातावरण मन को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए पत्थरों और लोहे से बने पुलों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे नर्मदा नदी के मनोहारी दृश्य भी देखने को मिलते हैं.
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक समय धरती पर धर्म की कमी हो गई थी, तब देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने स्वयं को ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया था. इसी स्थान को ओंकारेश्वर कहा गया. माना जाता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शिव कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है.
सालभर यहा, भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन महाशिवरात्रि और सावन माह में वातावरण और भी पावन और उत्साहपूर्ण हो जाता है. प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक ऊर्जा और नर्मदा का शांत प्रवाह ओंकारेश्वर को एक ऐसा तीर्थ बनाता है, जहां हर आगंतुक आत्मिक शांति का अनुभव करता है.
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